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ा.का.नि.1052.--राजभाषा अधिनियम, 1963 (1963 का 19) की धारा 3 की उपधारा (4) के साथ पठित धारा 8 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्रीय सरकार निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थात :-
संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ.-- (1) इन नियमों का संक्षिप्त नाम राजभाषा (संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग) नियम,1976 है ।
(2) इनका विस्तार, तमिलनाडु राज्य के सिवाय सम्पूर्ण भारत पर हे ।
(3) ये राजपत्र में प्रकाशित की तारीख को प्रवृत्त होंगे ।
2. परिभाषाएं- इन नियमों में जब तक कि संदभ़ से अन्यता अपक्षित न हो :-
(क) `अधिनियम' से राजभाषा अधिनियम, 1963 (1963 का 19) अभिप्रेत है :
(ख) `केंद्रीय सरकार के कार्यालय' के अन्तर्गत निम्नलिखित भी है,
अर्थात :-
(ग) केंद्रीय सरकार का कोई मंत्रालय, विभाग या कार्यालय,
(व) केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त किसी आयोग, समिति या अधिकरण का कोई कार्यालय, और
(वव) केंद्रीय सरकार के स्वामित्व में, या नियंत्रण के अधीन किसी निगम या कम्पनी का कोई
कार्यालय
(ग) `कर्मचारी' से केंद्रीय सरकार के कार्यालय में नियोजित कोई व्यक्ति अभिप्रेत है ,
(घ) `अधिसूचित कार्यालय' से नियम
10 के उपनियम (4) के अधीन अधिसूचित कार्यालय अभिप्रेत है,
(ङ) `हिन्दी में प्रवीणता से नियम 9 में वर्णित प्रवीणता अभिप्रेत है ,
(च) क्षेत्र क से बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्य तथा दिल्ली संघ राज्य प्रदेश अभिप्रेत है,
(छ) क्षेत्र ख से गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब राज्य तथा अंदमान और निकोबार द्वीप समूह तथा चणीग़ा संघ राज्य क्षेत्र अभिप्रेत है ,
(ज) क्षेत्र गठ से खण (च) और
(छ) में निर्दिष्ट राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों से भिन्न राज्य तथा संघ राज्यक्षेत्र अभिप्रेत है ,
(झ) `हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान' से नियम
10 में
वर्णित कार्यसाधक ज्ञान अभिप्रेत है ।
3. राज्यों आदि तथा केंद्रीय सरकार के कार्यालयों से भ्निन कार्यालयों के साथ पत्रादि.--(1) केंद्रीय सरकार के कार्यालय से क्षेत्र `क' में किसी राज्य सा संघ राज्यक्षेत्र की या ऐसे
राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में किसी कार्यालय (जो केंद्रीय सरकार का कार्यालय न हो) या व्यक्ति के पत्रादि, असाधारण दशाओं को छ़ाकर हिन्दी में होंगे और उनमें से किसी को कोई
पत्रादि अंग्रेजी में भेजे जाते हैं तो उनके
साथ उनका हिन्दी अनुवाद भी भेजा जाएगा ।
(2) केंद्रीय सरकार के कार्यालय से--
(क) क्षेत्र `ख' में किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे
राज्य या संघ राज्यक्षेत्र में किसी कार्यालय (जो केंद्रीय सरकार का कार्यालय न हो) या व्यक्ति को पत्रादि मामूली तौर पर हिन्दी में होंगे और यदि इनमें से किसी को पत्रादि अंग्रेजी में भेजे जाते हैं तो उनके
साथ उनका हिन्दी अनुवाद भी भेजा जाएगा , परन्तु यदि कोई ऐसा राज्य या संघ राज्यक्षेत्र यह चाहता है कि किसी
विश्ष्टि वग़ के पत्रादि या उसके
किसी कार्यालय के लिए आशयित पत्रादि सम्बद्ध राज्य या संघ राज्यक्षेत्र की सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट अवधि तक अंग्रेजी या हिन्दी में भेजे जाएं और उसके
साथ दूसरी भाषा में उसका अनुवाद भी भेजा जाए तो ऐसे
पत्रादि उसी रीति से भ्टचजे जाएंगे ।
(ख) क्षेत्र `ख' के किसी राज्य या संघक्षेत्र में किसी व्यक्ति को पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में भेजे जा सकते
हैं ।
(3) केंद्रीय सरकार के कार्यालय से क्षेत्र `ग' में किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे
राज्य में किसी कार्यालय (जो केंद्रीय सरकार का कार्यालय न हों) या व्यक्ति को पत्रादि अंग्रेजी में होगे ।
(4) उपनियम (1) और (2) में
किसी बात के हुए
भी, क्षेत्र `ग' में केंद्रीय सरकार के कार्यालय से `क' या `ख' में किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र को या ऐसे
राज्यक्षेत्र को या ऐसे
राज्य में किसी कार्यालय ((जो केंद्रीय सरकार का कार्यालय न हों) या व्यक्ति को पत्रादि या अंग्रेजी में हो सकते
हैं ।
4. केंद्रीय सरकार के कार्यालय के बीच पत्रादि :-
क) केंद्रीय सरकार के किसी एक मंत्रालय या विभाग और किसी दूसरे मंत्रालय या विभाग के बीच पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते
हैं ।
ख) केंद्रीय सरकार के एक मंत्रालय या विभाग और क्षेत्र `क'में स्थित संलग्न या अधीनस्थ कार्यालयों के बीच पत्रादि हिन्दी में होंगे और ऐसे अनुपात में होंगे जो केंद्रीय सरकार ऐसे कार्यालयों में हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों की संख्या , हिन्दी में पत्रादि भेजने की सुविधाओं और उससे संबंधित आनुषंगिक बातें को अब ध्यान में
रखते हुए, समय-समय
पर , अवधारित करें ।
ग) क्षेत्र `क'में स्थित केंद्रीय सरकार के ऐसे कार्यालयों के बीच, जो खां (क) या खां (ख) विनिद़िष्ट कार्यालय से भिन्न है, पत्रादि हिन्दी में होंगें,
घ) क्षेत्र `क'में स्थित केंद्रीय सरकार के कार्यालयों औरक्षेत्र `ख'याक्षेत्र `ग'में स्थित केंद्रीय सरकार के कार्यालयों के बीच पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते
हैं।
श्र)
क्षेत्र `ख' या `गठ में
स्थित केंद्रीय सरकार के कार्यालयों के बीच पत्रादि हिन्दी या अंग्रेजी में हो सकते
हैं।
परन्तु जहां ऐसे पत्रादि :-
व) क्षेत्र `क' और `ख' के किसी कार्यालय को सम्बोधित हैं वहां, यदि आवश्यक हो तो,
उनका दूसरी भाषा में अनुवाद पत्रादि प्राप्त करने के स्थान पर किया जाएगा ।
वव) क्षेत्र `ग' किसी कार्य़ालय को संबोधित है वहां , उनका दूसरी भाषा में अनुवाद उनके साथ भेजा जाएगा । परन्तु यह और कि यदि कोई पत्रादि किसी अधिसूचित कार्यालय को संबेंधित है तो दूसरी भाषा
में ऐसा अनुवाद उपलब्ध कराने की अपेक्षा नहीं की जाएगी ।
5. हिन्दी में प्राप्त पत्रादि के उत्तर - नियम 3 और नियम 4 में किसी बात के होते हुए भी हिन्दी में पत्रादि के उत्तर केंद्रीय सरकार के कार्यालय से हिन्दी में दिए जाएगें ।
6. हिन्दी और अंग्रेजी के प्रयोग- अधिनियम की धारा 3 के उपधारा 3 में
निद़िष्ट सभी दस्तावेजों के लिए हिन्दी और अंग्रेजी दोनों का प्रयोग किया जाएगा । और ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षार करने वाले व्यक्तियों का यह उत्तरदायित्व होगा कि वे यह सुनिश्चित कर लें कि ऐसे
दस्तावेज हिन्दी और अंग्रेजी दोनों में तैयार किए जाते हैं, निष्पादित किये जाते हैं और जारी
किये जाते हैं ।
7. आवेदन, अभ्यावेदन, आदि -
1. केइ
कर्मचारी आवेदन , अपील या अभ्यावेदन हिन्दी या अंग्रेजी में कर सकता
हैं ।
2. जब उपनियम (1) में निद़िष्ट कोई आवेदन, अपील या अभ्यावेदन हिन्दी में किया गया हो या उस पर हिन्दी में हस्ताक्षर किए गए हों
तब उसका उत्तर हिन्दी में दिया जाएगा ।
3. यदि कोई कर्मचारी यह चाहता है कि सेवा
संबंधी विषयों (जिनके अंतर्गत उनुशासनिक कार्यवाहियां भी है)
से संबंधित कोई आदेश या सूचना,
जिसका कर्मचारी पर तामील किया जाना अपक्षित है, यथास्थित ,हिन्दी या अंग्रेजी में होनी चाहिए तो वह उसे
असम्यक विलम्ब के बिना उसी भाषा में दी जाएगी ।
8. केन्दीय सरकार के कार्यालयों में टिप्पणी का लिखा जाना
1. कोई
कर्मचारी किसी फाइल पर टिप्पणी या मसौदा हिन्दी या अंग्रेजी में हिलख सकता है और उससे यह अपेक्षा नहीं की जाएगी कि वह उसका
अनुवाद दूसरी भाषा में पास्तुत करे ।
2. केंद्रीय सरकार का कोई भी कर्मचारी, जोहिनदी का याय़साधक ज्ञान रखता है, हिन्दी में किसी दस्तावेज के अंग्रेजी की मांग तभी कर सकता
है, जब वह दस्तावेज विधिक या तकनीकी प्रkचञढति का है,
अन्यथा नहीं ।
3. यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई
विशिष्ट दस्तावेज विधिक या तकनीकी प्रkचञढति का है या नही तो विभाग या कार्यालय का प्रधान उसका विनिश्चय करेगा ।
4. उपनियम (1) में किसी बात के होते
हुए भी, केंद्रीय सरकार , आदेश द्वारा ऐसे अधिसूचित कार्यालयों को विनिद़िष्ट कर सकती है जहां
ऐसे कर्मचारियों द्वारा, जिन्हें हिन्दी में प्रवीणता है, टिप्पण, प्रारूपण और ऐसे अन्य शासकीय प्रयोजनों के लिए, जो आदेश में विनिद़िष्ट किए जाएं , केवल हिन्दी का प्रयोग कियाजाएगा ।
9. हिन्दी में प्रवीणता -
क. मैट्रिक परीक्षा या उसकी समतुल्य या उससे उच्चतर कोई भी परिक्षा हिन्दी के माध्यम से उत्तीर्ण कर ली है, या
ख. स्नातक परीक्षा में अथवा स्नातक परीक्षा के समतुल्य या उससे उच्चतर किसीअन्य परिक्षा में हिन्दी को एक वैकाfल्पक विषय के रूप मे डलिया था, या
ग. यदि वह इन नियमों से उपाबद्ध प्ररूप में यह घोषणा करता
है कि उसने हिन्दी में प्रवीणता प्राप्त कर ली है ।
10. हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान -
1. (क)
यदि किसी कर्मचारी ने -
(kच) मैट्रिक या उसकी समतुल्य या उससे उच्चतर परीक्षा हिन्दी के साथ उत्तीर्ण कर ली है , या
(व) केंद्रीय सरकार की हिन्दी प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत आयोजित प्राष्ठा परिक्षा या , जब उस सरकार द्वारा किसी विशिष्ट प्रवग़ के पदों के संबंध में
उस योजना के अंतर्गत कोई निम्नतर परिक्षा विनिद़िष्ट है, तब वह परिक्षा उत्तीर्ण कर ली है,
(क) केंद्रीय सरकार द्वारा उस निमित्त विनिद़िष्ट कोई अन्य परिक्षा उत्तीर्ण कर ली है, या
(ख) यदि वह इन नियमों से उपाबद्ध प्ररूप में यह घोषणा करता
है कि उसने ऐसा ज्ञान प्राप्त कर
लिया है, तो उसके बारे में यह समझा
जाएगा कि उसने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है ।
2. यदि केंद्रीय सरकार के किसी कार्यालय में कार्य करने वाले कर्मचारियों में से अस्सी प्रतिशत ने हिन्दी का ऐसा ज्ञान प्राप्त कर लिया है तो उस कार्यालय के कर्मचारियों के बारे में सामान्यतया यह समझा जाएगा कि उन्होंने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है ।
3. केंद्रीय सरकार या केंद्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त विनिद़िष्ट कोई अधिकारी यह अवधारित कर सकता है कि केंद्रीय सरकार के किसी कार्यालय के कर्मचारियों ने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है या नहीं।
4. केंद्रीय सरकार के जिन कार्यालयों के कर्मचारियों ने हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त कर लिया है,
उन कार्यालयों के नाम, राजपत्र में अधिसूचित किए जाएंगे ।
परन्तु यदि केंद्रीय सरकार की राय है कि किसी अधिसूचित कार्यालय में काम करने वाले और हिन्दी का कार्यसाधक ज्ञान रखने वाले कर्मचारियों का प्रतिशत किसी तारीख से, उपनियम (2) में
विनिद़िष्ट प्रतिशत से कम हो गया है, तो यह राजपत्र में अधिसूचना द्वारा घोषित कर सकती है कि उक्त कार्यालय उस तारीख से अधिसूचित कार्यालय नहीं रह जाएगा ।
11. मैन्युअल, संहिताएं और प्रक्रिया संबंधी अन्य साहित्य, लेखन सामग्री आदि -
1. केंद्रीय सरकार के कार्यालय से संबंधित सभ मैन्युअल , संहिताएं और प्रक्रिया संबंधी अन्य साहित्य हिन्दी ओर |